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राजनीति


पांच राज्यों की चुनावी रणभेरी 2019 का लिटमस टेस्ट, देखना है कौन किस पर पड़ता है भारी

मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में 12 नवंबर से लेकर 7 दिसंबर तक चुनाव ,11 दिसंबर को आएंगे नतीजे ,देखना है कौन किस पर पड़ता है भारी


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पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में 12 नवंबर से लेकर 7 दिसंबर तक चुनाव कराए जाएंगे। 11 दिसंबर को चुनाव परिणाम आएंगे। इन राज्यों की चुनावी रणभेरी का मतलब यह भी होगा कि वर्ष 2019 के आम चुनाव में किसकी खिचड़ी पकेगी।

तीन राज्यों- मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार है, जबकि मिजोरम में कांग्रेस तथा तेलंगाना में टीआरएस की। नतीजों के एलान के छह महीनों के भीतर देश में आम चुनाव होंगे, यानी केंद्र में मोदी सरकार की परीक्षा भी इन चुनावों के नतीजों जुड़ी होगी। निश्चित रूप से भारतीय राजनीति के लिए इन राज्यों के नतीजे यानी 11 दिसंबर का दिन बेहद महत्वपूर्ण होगा।

मध्यप्रदेश में नवंबर, 2005 में पहली बार शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने और तब से लगातार अब तक यानी तीन बार और 14 साल से मुख्यमंत्री हैं। पिछली बार 230 विधानसभा सीटों में से भाजपा ने 166 जीती थीं। कांग्रेस को 57, बसपा को 4 और अन्य को तीन सीटें मिली थीं। अब चुनौतियां तगड़ी हैं।

सबसे बड़ी चुनौती जहां एंटी-इनकम्बेंसी होगी, वहीं इस बार सवर्ण समाज के लोगों की एकजुटता और मप्र की राजनीति में एकाएक उभरा संगठन 'सपाक्स' भाजपा और कांग्रेस दोनों के चुनावी गणित को बिगाड़ता दिख रहा है। मध्यप्रदेश में 28 नवंबर को चुनाव है।

उधर, राजस्थान में पिछले चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी, जबकि इस बार कांग्रेस और भाजपा में सीधी टक्कर दिख रही है। कुल 200 विधानसभा सीटों में 160 सीट जीतने का भाजपा का रिकॉर्ड इस बार कितना रहेगा, यह खुद भाजपा में ही पूछा जा रहा है।

पिछली बार कांग्रेस 21 सीटों पर सिमट गई थी, वहीं बसपा को 3, एनपीपी को 4 और एनयूजेडपी को 2 सीटें मिली थीं। जबकि 7 सीटों पर निर्दलीय जीते थे। हर चुनाव में सरकार बदल देने के लिए पहचान बना चुके राजस्थान में वसुंधरा राजे का जादू कितना चलेगा, कहना जल्दबाजी होगी। राजस्थान में 7 दिसंबर को चुनाव होगा।

साल 2000 में अस्तित्व में आए छत्तीसगढ़ में केवल तीन साल ही कांग्रेस सत्ता में रही, उसके बाद 2003 यानी लगभग 15 बरस से लगातार रमन सिंह के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार है। छत्तीसगढ़ के सियासी हालात भी लगभग राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे ही दिख रहे हैं।

यहां भी भाजपा को एंटी-इनकम्बेंसी का डर सता रहा है, लेकिन कांग्रेस भी अपने पुराने साथी अजीत जोगी के नए दल 'छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस' और मायावती के गठबंधन से परेशान जरूर है।

जोगी ने मायावती के साथ गठबंधन कर कांग्रेस का समीकरण बिगाड़ा है, वहीं गोंडवाना पार्टी भी नाक में दम किए हुए है। पिछली बार भाजपा को 49, कांग्रेस को 39, बसपा को 1 और अन्य को एक सीट मिली थी। यहां दो चरणों में 12 व 20 नवंबर को वोट डाले जाएंगे।

पूर्वोत्तर का राज्य मिजोरम 1987 में अस्तित्व में आया था। यहां पहली बार वर्ष 1989 में कांग्रेस की सरकार बनी थी, जो लगातार दो बार सत्ता में रही। फिर दो बार मिजो नेशनल फ्रंट की सरकार रही।

वर्ष 2008 से कांग्रेस फिर सत्ता में है। कुल 40 विधानसभा सीटे हैं। वर्ष 2013 के चुनाव में कांग्रेस को 34, एमएनएफ को 5 और और एमपीसी को 1 सीट मिली थी। इस बार चौथे दल के रूप में भाजपा भी चुनाव में चुनौती को तैयार है। मिजोरम में 28 नवंबर को मतदान होगा।

तेलंगाना में अगले साल विधानसभा चुनाव होने थे लेकिन मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने समय से पहले विधानसभा भंग कर दी और चुनाव में जाने का फैसला किया। तेलंगाना में 119 सीटें हैं और एक सीट एंग्लो इंडियन कम्यूनिटी के लिए है।

पिछले चुनाव में टीआरएस को 63 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इसके अलावा कांग्रेस को 21, तेलुगु देशम पार्टी को 15, एआईएमआईएम को 7, बीजेपी को 5 और अन्य को 8 सीटें मिली थीँ। यहां 7 दिसंबर को चुनाव होगा।

किसान आंदोलन, पेट्रोलियम की कीमतों में उछाल, बाढ़, नोटबंदी की हकीकत और बेरोगजगारी के असल आंकड़ों की सच्चाई के बीच पांच राज्यों में होने जा रहे चुनाव के नतीजे भाजपा के लिए वर्ष 2019 का लिटमस टेस्ट बनेंगे।

देखना यही है कि भाजपा और कांग्रेस की सीधी टक्कर में कौन किस पर भारी पड़ता है। इन चुनावों को 2019 का सेमी फ़ाइनल भी कहा जा रहा है।

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