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मनोरंजन


जन्मदिन विशेष | ट्रेजेडी क्वीन मीना कुमारी की लिखी वो नज्में जिनमें दर्द का सिलसिला रुकता ही नहीं!

"आग़ाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता, जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता" दिलीप कुमार को अगर ट्रेजेडी किंग कहा जाता है, तो मीना कुमारी को ट्रेजेडी क्वीन के नाम से पहचाना जाता है


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सिनेमा के रुपहले पर्दे पर अगर आज भी किसी अभिनेत्री को ख़ालिस भारतीय नारी की प्रतिमूर्ति के रूप में देखा जाता है, तो यकीनन वह मीना कुमारी हैं। 'साहब बीबी और गुलाम' की बहू से लेकर 'पाकीज़ा' की साहबजान तक, अपने हर किरदार से मीना कुमारी ने एक भारतीय स्त्री के भावों और विमर्श को जैसे जीवंत कर दिया था। आज उनका जन्मदिन है।

1 अगस्त, 1932 को मुंबई में जन्मी मीना कुमारी के अनेकों किस्से, आज भी फिल्मों की दुनिया में बड़े चाव से सुने और सुनाये जाते हैं। चाहे धर्मेन्द्र से उनके अफेयर की कहानी हो, या अदाकारी के किंग कहे जाने वाले दिलीप कुमार जैसे अभिनेता का उनके सामने नर्वस हो जाना हो, या फिर राजकपूर का उनके सामने अपने संवाद भूल जाना हो, ये सब किस्से आज भी बेहद मशहूर हैं और ये बताते हैं कि मीना कुमारी किस लीग की अभिनेत्री थीं।

मीना कुमारी को अभिनेत्रियों की दुनिया में वही मुकाम हासिल है, जो दिलीप कुमार को अभिनेताओं की दुनिया में मिला है। दिलीप कुमार को अगर ट्रेजेडी किंग कहा जाता है, तो मीना कुमारी को ट्रेजेडी क्वीन के नाम से पहचाना जाता है। उनकी जिंदगी ही कुछ ऐसी थी, जिसमें दर्द और अकेलापन भरा पड़ा था। और इसी दर्द को उन्होंने पर्दे पर उतार दिया।

उन्होंने मशहूर निर्देशक कमाल अमरोही से निकाह किया, कमाल पहले से शादीशुदा थे लेकिन मीना कुमारी के प्रेम में उन्होंने दूसरी शादी कर ली। शादी 10 साल चली और फिर टूट गयी। 

अपने 33 साल के करियर में 90 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाली, महजबीं बानो (उनका असली नाम यही था), एक बहुत अच्छी शायरा भी थीं। उनके शेर और अशआर से बेइन्तहां दर्द झलकता है। शायद जो कुछ उन्होंने झेला, वह शब्दों में पिरोकर अपनी डायरी में उतार दिया।

उनकी शायरी को बाद में मशहूर गीतकार और शायर गुलजार ने 'तन्हा चांद' नाम से एक किताब में संकलित किया और आम लोगों तक पहुंचाया। उनकी लिखी कुछ बेहद मशहूर नज्में हम आपके लिए लेकर आये हैं। पढ़िए उनकी लिखी बेहद मशहूर नज्में - 

#1

आग़ाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता 

जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता 

जब ज़ुल्फ़ की कालक में घुल जाए कोई राही 

बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता 

हँस हँस के जवाँ दिल के हम क्यूँ न चुनें टुकड़े 

हर शख़्स की क़िस्मत में इनआ'म नहीं होता 

दिल तोड़ दिया उस ने ये कह के निगाहों से 

पत्थर से जो टकराए वो जाम नहीं होता 

दिन डूबे है या डूबी बारात लिए कश्ती 

साहिल पे मगर कोई कोहराम नहीं होता 

#2

हँसी थमी है इन आँखों में यूँ नमी की तरह 

चमक उठे हैं अंधेरे भी रौशनी की तरह 

तुम्हारा नाम है या आसमान नज़रों में 

सिमट गया मेरी गुम-गश्ता ज़िंदगी की तरह 

कोहर है धुँद धुआँ है वो जिस की शक्ल नहीं 

कि दिल ये रूह से लिपटा है अजनबी की तरह 

तुम्हारे हाथों की सरहद को पा के ठहरी हुईं 

ख़लाएँ ज़िंदा रगों में हैं सनसनी की तरह 

 

#3

टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली 

रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी
आँखें हँस दीं दिल रोया, यह अच्छी बरसात मिली 

जब चाहा दिल को समझें, हँसने की आवाज़ सुनी
जैसे कोई कहता हो, ले फिर तुझको मात मिली 

मातें कैसी घातें क्या, चलते रहना आठ पहर
दिल-सा साथी जब पाया, बेचैनी भी साथ मिली 

होंठों तक आते आते, जाने कितने रूप भरे
जलती-बुझती आँखों में, सादा-सी जो बात मिली

मीना कुमारी के लिखे कुछ अन्य मशहूर शेर-

दिल तोड़ दिया उस ने ये कह के निगाहों से
पत्थर से जो टकराए वो जाम नहीं होता।


हँसी थमी है इन आँखों में यूँ नमी की तरह
चमक उठे हैं अंधेरे भी रौशनी की तरह।

 

पूछते हो तो सुनो, कैसे बसर होती है 
रात ख़ैरात की, सदक़े की सहर होती है।

 

एक बात जो होठों तक कभी आयी नहीं
बस आँखों से ही झांकती
तुमसे कभी मुझसे कभी
कुछ लफ्ज़ है वो मांगती।

 

होंठों तक आते आते 
जाने कितने रूप भरे
जलती-बुझती आँखें में
सादा-सी जो बात मिली।

 

राह देखा करेगा सदियों तक 
छोड़ जाएँगे ये जहाँ तन्हा।

 

सब तुम को बुलाते हैं
पल भर को तुम आ जाओ
बंद होती मेरी आँखों में
मुहब्बत का
इक ख्वाब सजा जाओ।

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