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फीचर


डॉग डे विशेष | म्हारे कुत्ते अमेरिकियों से कम हैं के!

यह ठीक है कि अमेरिकी कुत्तों का डॉग डे बेहद शानदार होता है, यह अमेरिका में कुत्ता प्रशंसा दिवस के तौर पर भी मनाया जाता है और इसका प्रभाव दूसरे कई देशों में भी है वे भी आज के दिन वे कुत्तों की बड़ी खातिर करते हैं, मान रखते और बड़ा ख्याल करते हैं


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कहते हैं हर कुत्ते का एक दिन होता है, होता होगा। फिलहाल जिस धूम धाम से अमेरिका अपने वहां नेशनल डॉग डे मनाता है, लगता है ऐसा महज अमेरिकी कुत्तों के साथ में ही होता है।

अमेरिकी नेशनल डॉग डे का जो जलवा है किसी कुत्ता दिवस का नहीं। सात समंदर पार भारत और कई यूरोपीय तथा दूसरे देश के लोग भी उससे प्रभावित होते हैं।

नेशनल डॉग डे जैसी ख्याति और व्याप्ति तो अंतरराष्ट्रीय कुत्ता दिवस की भी नहीं। वैसे भी 19 मई को अंतररष्ट्रीय कुत्ता दिवस एक संस्था द्वारा मनाया जाता है, जिसको कुता प्रेमियों की व्यापक स्वीकृति मिलनी अभी शेष है।

यह तभी संभव दिखता है जब विश्व के सभी कुत्ते या कुत्ता प्रेमी मिल कर कोई समेकित प्रयास करें। यह एकता अभी तक दुर्लभ दिखी है।

ऐसे में भारत, भूटान और नेपाल इत्यदि देशों ने दीपावली के दौरान पांच दिनों तक मनाये जाने वाले कुकुर तिहार वाले दिन को अंतरराष्ट्रीय कुत्ता दिवस मनने की अपील कुछ कुत्ता प्रेमियों ने इंटरनेट पर जारी की है।

कुकुर का मतलब कुत्ता और तिहार का अर्थ है त्योहार। भूटान में इसी पर्व को खीचा पूजा कहते हैं। यह त्योहार नेपाल और भूटान के अलावा लगायत क्षेत्रों में भी मनाया जाता है।

इस दिन कुत्तों को तिलक लगाया जाता है उनकी पसंद वाला भोग लगाया जाता है, माला पहनाई जाती है। बाकायदा पूजा, अर्चना की जाती है और उस दिन बिल्कुल श्वान भगवान की तरह उन्हें खासा सम्मान दिया जाता है।

अमेरिकी मानते हैं कि कुत्तों का साथ उन्हें सुरक्षा देता है, तनाव मुक्त करता है पर हमारी अपेक्षा और मान्यता उनसे कहीं ऊपर है, हम मानते हैं कि कुत्ते की सेवा करने से शनि देव की कृपा होती है, सारी परेशानियों से सदा के लिए मुक्ति मिल जाती है।

साढ़ेसाती, ढैय्या और कुंडली के दूसरे कई कोई दोष दूर हो जाते हैं। हम कुत्तों को राहु-केतु, काल सर्प योग से लेकर जानवर, भूत, चोरों, लुटेरों सबका अकसीर इलाज मानते हैं, जलेबी, तेल चुपड़ी रोटी और तमाम तर माल खिलाते हैं।

यह ठीक है कि अमेरिकी कुत्तों का डॉग डे बेहद शानदार होता है, यह अमेरिका में कुत्ता प्रशंसा दिवस के तौर पर भी मनाया जाता है और इसका प्रभाव दूसरे कई देशों में भी है, वे भी आज के दिन वे कुत्तों की बड़ी खातिर करते हैं, मान रखते और बड़ा ख्याल करते हैं।

आपको लग सकता है कि अपने देश के कुत्ते तो बहुत उपेक्षित, वंचित श्रेणी के हैं, कुछ को छोड़ कर बस दुरदुराये ही जाते हैं, कोई प्रशंसा नहीं करता देश में तो श्वान सम्मान जैसी कोई चीज ही नहीं।

मनुष्य के सबसे अच्छे दोस्त के अवदान को हम यों ही भुलाये बैठे हैं। हमारे यहां न उनकी वार्षिक पूजा है न कोई उनका कोई दिन विशेष न खास त्योहार।

पर ऐसा नहीं है। माना कि पर हमारे वहां सड़क छाप कुत्तों हालत बहुत खराब दिखती हो, वे दर बदर हों, उनकी देखरेख करने वाला कोई न हो, पर दूसरे हर तरह के कुत्तों की हमारे समाज में बड़ी पूछ है।

सिनेमा समाज का दर्पण है और हमारी कई फिल्मों के कुत्तों ने कमाल किया है, उन पर गाने फिल्माये गये हैं। अपने देश में भी कई जगह कुत्तों की पूजा आरती होती है।

होंगे अमेरिकियों के कुत्ते प्यारे, पर हमारे लिये श्वान देव, भैरव देवता हैं। वे कुत्तों को प्यार करते होंगे पर हम तो बाकायदा उन्हें मंदिर बना कर पूजते हैं। हम गर्व से कह सकते हैं कि म्हारे कुत्ते अमेरिकियों से कम हैं के, तो इस 26 अगस्त को अमेरिका के नेशनल डॉग डे पर हम अपने श्वान मंदिरों को याद कर लें।

कुत्ते की प्राचीन समाधि

सिकंदराबाद जो बुलंदशहर से 15 किलोमेटरदोर एक इंडस्ट्रियल इलाका  है यहा6 100 साल पुरानी समाधि है. होली, दीपावली को इस कब्र पर मेला लगता है और समय समय पर भंडारे का आयोजन होता है। मान्यता है कि यहां मांगी गई मन्नत पूरी होती है सो साधु लटूरिया बाबा के कुत्ते की इस कब्र पर हजारों लोग मन्नत मांगने आते हैं और पूजा याचना करते हैं।

लक्खा बंजारे के कुत्ते का मंदिर

इसे लक्खा बंजारे के कुत्ते का मंदिर कहते हैं। पास ही भैरव बाबा का मंदिर भी है। कुत्ते की समाधि के पास एक हौज है। समाधि पर प्रसाद चढाने और बांटने के बाद लोग इस हौज में नहाते हैं। जिसमे भरे पानी से नहाने के बाद कुत्ते के कटने का असर दूर हो जाने की जनास्था है। मंदिर गाजियाबाद के पास चिपियाना में है।

कर्नाटक का कुत्ता मंदिर

कर्नाटक के रामनगर जिले के चिन्नपटना गांव में कुत्ते का मंदिर बना है। लोग मानते हैं कि इस मंदिर में पूजा करने से कुत्ता देवता उनके परिवार की उसी तरह हिफाजत करते हैं, जैसे कोई पलतू कुत्ता अपने मालिक के परिवार को विपत्तियों से बचाता है। इस मंदिर और कुत्ता देव से संबंधित चमत्कारों के कई किस्से इस इलाके में सुने सुनाये जाते हैं।

कुतिया देवी का मंदिर, झांसी  

झांसी में ककवारा और रेवान नाम के दो गांवों के बीच की सीमा पर एक कुतिया का मंदिर है जिसमें भक्तगण धूप दीप नैवेढ्य और पुष्प गंध सहित प्रसाद चढ़ाकर पूजा अर्चना आरती करते हैं. इस कुतिया की कथा इस क्षेत्र में बड़ी श्रद्धा से सुनाई जाती है. कुतिया देवी के इस मंदिर के लिये बाकायदा पुजारी नियुक्त है।  

कुकुरदेव मिटायें खांसी

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक मंदिर है, नाम है कुकुर देव मंदिर। यहां के खपरी गांव के इस प्राचीन मंदिर के देव दर्शन से और पूज अर्चना करने से कुत्ते के काटने का तो डर जाता ही रहता है, बल्कि कुकुर खांसी होने की आशंका भी खत्म हो जाती है। कहते हैं कि यह मंदिर 15वीं शताब्दी से पहले का है।

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