Ind vs Aus: आज धौनी बना सकते हैं ये बड़ा रिकॉर्ड, फिर कभी नहीं पाएगा ऐसा! - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       फैसला/ आलोक वर्मा के बाद अस्थाना सहित 4 और अधिकारी पद से हटाए गए - Dainik Bhaskar     |       बीएसएफ में खराब खाने का आरोप लगाने वाले जवान तेज बहादुर के बेटे की संदिग्ध हालत में मौत - नवभारत टाइम्स     |       आयुष्‍मान भारत के मुरीद बिल गेट्स, मोदी सरकार के लिए कही ये बात - Business - आज तक     |       BJP president Amit Shah admitted to AIIMS for swine flu treatment - Times Now     |       कर्नाटक में BJP का 'ऑपरेशन कमल' फ्लॉप, नेता संत स्वामी की बीमारी का बहाना बना कर घर लौटे - News18 Hindi     |       News18 Explains: Dissent Within Judiciary Over Collegium Recommendations In Judicial Appointments - News18     |       मायावती भतीजे आकाश को बसपा में शामिल कर विरोधियों को देंगी जवाब - Hindustan     |       यूके/ ब्रेग्जिट डील फेल होने के बाद संसद में थेरेसा मे अविश्वास प्रस्ताव में जीतीं, 19 वोटों से बचाई सरकार - Dainik Bhaskar     |       बोगोटा ब्लास्ट: कार बम धमाके में कम से कम नौ लोगों की मौत - BBC हिंदी     |       देखें, चीनी कंपनी ने अमानवीयता की हदें पार कीं, कर्मचारियों को सड़क पर घुटनों के बल चलाया - नवभारत टाइम्स     |       SHOCKING: Chinese company forces employees to crawl on roads for failing to meet year-end targets - Watch - Times Now     |       Rupee opens 9 paise higher at 71.15 against US dollar - Times Now     |       Vistara 4th anniversary sale! Book tickets starting at Rs 899. Details here - Times Now     |       बुधवार को मामूली गिरावट के बाद फिर बढ़े पेट्रोल डीजल के दाम, जानें आज के भाव - NDTV India     |       RIL ने किया 'कमाल', ऐसा करने वाली देश की इकलौती प्राइवेट कंपनी, मुकेश अंबानी ने कहा- शुक्रिया - Zee Business हिंदी     |       सलमान खान को दोस्त बता कर कंगना रनौत ने ज़ाहिर कर दी अपनी इच्छा - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       Rooting For My Baby: Miley Cyrus Is Reportedly Expecting A Baby Girl! - breatheheavy.com     |       Victoria Beckham uses moisturiser made from her own blood - gulfnews.com     |       Hero Vardiwala Trailer: पहली भोजपुरी वेब सीरीज में निरहुआ-आम्रपाली - आज तक     |       MS Dhoni on cusp of achieving new milestone in 3rd ODI against Australia at MCG - Times Now     |       Australian Open: Kei Nishikori survives huge scare against Ivo Karlovic - Times Now     |       जेसन गिलेस्‍पी ने भारत को बताया वर्ल्‍डकप-2019 का खिताबी दावेदार, बुमराह की तारीफ में कही यह बात - NDTV India     |       क्रिकेट/ ऋषभ ने प्रेमिका ईशा नेगी के साथ साझा की तस्वीर, चार लाख से ज्यादा मिले लाइक्स - Dainik Bhaskar     |      

साहित्य/संस्कृति


हिंदी दिवस विशेष | पढ़िए हिंदी की सर्वश्रेष्ठ कविताओं में गिनी जाने वाली कविता ‘टूटी हुई बिखरी हुई’

‘टूटी हुई बिखरी हुई’ में प्रेम की करुणा दिखाई देती है, जो अपने विलक्षण बिंबों, अति-यथार्थवादी दृश्यों के कारण चर्चित हुई


hindi-diwas-special-read-poem-one-the-best-poem-of-hindi-writen-by-shamsher-bahadur-singh

आज हिंदी दिवस है। अपनी संस्कृति के प्रति गौरव का बोध कराता यह दिन हम सब को हिंदी के लिए बेहतर करने की प्रेरणा देता है। यह तय है कि आने वाली पीढ़ी का बेहतर विकास तभी हो सकेगा, जब वह अपनी मातृ भाषा में सोचने एवं समझने की क्षमता विकसित कर सकेगी।

यहां हम आपके लिए आधुनिक हिंदी कविता की प्रगतिशील त्रयी के एक स्तंभ माने जाने वाले शमशेर बहादुर सिंह की महान रचना ‘टूटी हुई बिखरी हुई’ लेकर आए हैं इसे हिंदी की सर्वश्रेष्ठ कविताओं में से एक माना जाता है। ‘टूटी हुई बिखरी हुई’ में प्रेम की करुणा दिखाई देती है, जो अपने विलक्षण बिंबों, अति-यथार्थवादी दृश्यों के कारण चर्चित हुई।

 

टूटी हुई बिखरी हुई चाय
            की दली हुई पाँव के नीचे
                    पत्तियाँ
                       मेरी कविता

बाल, झड़े हुए, मैल से रूखे, गिरे हुए, 
                गर्दन से फिर भी चिपके
          ... कुछ ऐसी मेरी खाल,
          मुझसे अलग-सी, मिट्टी में
              मिली-सी

दोपहर बाद की धूप-छाँह में खड़ी इंतजार की ठेलेगाड़ियाँ
जैसे मेरी पसलियाँ...
खाली बोरे सूजों से रफू किये जा रहे हैं...जो
                  मेरी आँखों का सूनापन हैं

ठंड भी एक मुसकराहट लिये हुए है
                 जो कि मेरी दोस्‍त है।

कबूतरों ने एक गजल गुनगुनायी . . .
मैं समझ न सका, रदीफ-काफिये क्‍या थे,
इतना खफीफ, इतना हलका, इतना मीठा
                उनका दर्द था।

आसमान में गंगा की रेत आईने की तरह हिल रही है।
मैं उसी में कीचड़ की तरह सो रहा हूँ
                और चमक रहा हूँ कहीं...
                न जाने कहाँ।

मेरी बाँसुरी है एक नाव की पतवार -
                जिसके स्‍वर गीले हो गये हैं,
छप्-छप्-छप् मेरा हृदय कर रहा है...
              छप् छप् छप्व

वह पैदा हुआ है जो मेरी मृत्‍यु को सँवारने वाला है।
वह दुकान मैंने खोली है जहाँ 'प्‍वाइजन' का लेबुल लिए हुए
                 दवाइयाँ हँसती हैं -
उनके इंजेक्‍शन की चिकोटियों में बड़ा प्रेम है।

वह मुझ पर हँस रही है, जो मेरे होठों पर एक तलुए
                         के बल खड़ी है
मगर उसके बाल मेरी पीठ के नीचे दबे हुए हैं
          और मेरी पीठ को समय के बारीक तारों की तरह
          खुरच रहे हैं
उसके एक चुम्‍बन की स्‍पष्‍ट परछायीं मुहर बनकर उसके
          तलुओं के ठप्‍पे से मेरे मुँह को कुचल चुकी है
उसका सीना मुझको पीसकर बराबर कर चुका है।

मुझको प्‍यास के पहाड़ों पर लिटा दो जहाँ मैं
          एक झरने की तरह तड़प रहा हूँ।
मुझको सूरज की किरनों में जलने दो -
          ताकि उसकी आँच और लपट में तुम
          फौवारे की तरह नाचो।

मुझको जंगली फूलों की तरह ओस से टपकने दो,
          ताकि उसकी दबी हुई खुशबू से अपने पलकों की
          उनींदी जलन को तुम भिगो सको, मुमकिन है तो।
हाँ, तुम मुझसे बोलो, जैसे मेरे दरवाजे की शर्माती चूलें
          सवाल करती हैं बार-बार... मेरे दिल के
          अनगिनती कमरों से।

हाँ, तुम मुझसे प्रेम करो जैसे मछलियाँ लहरों से करती हैं
           ...जिनमें वह फँसने नहीं आतीं,
जैसे हवाएँ मेरे सीने से करती हैं
           जिसको वह गहराई तक दबा नहीं पातीं,
तुम मुझसे प्रेम करो जैसे मैं तुमसे करता हूँ।

आईनो, रोशनाई में घुल जाओ और आसमान में
           मुझे लिखो और मुझे पढ़ो।
आईनो, मुसकराओ और मुझे मार डालो।
आईनो, मैं तुम्‍हारी जिंदगी हूँ।

एक फूल उषा की खिलखिलाहट पहनकर
           रात का गड़ता हुआ काला कम्‍बल उतारता हुआ
           मुझसे लिपट गया।

उसमें काँटें नहीं थे - सिर्फ एक बहुत
           काली, बहुत लम्बी जुल्‍फ थी जो जमीन तक
           साया किये हुए थी... जहाँ मेरे पाँव
           खो गये थे।

वह गुल मोतियों को चबाता हुआ सितारों को
           अपनी कनखियों में घुलाता हुआ, मुझ पर
           एक जिन्‍दा इत्रपाश बनकर बरस पड़ा -

और तब मैंने देखा कि मैं सिर्फ एक साँस हूँ जो उसकी
           बूँदों में बस गयी है।
           जो तुम्‍हारे सीनों में फाँस की तरह खाब में
           अटकती होगी, बुरी तरह खटकती होगी।

मैं उसके पाँवों पर कोई सिजदा न बन सका,
           क्‍योंकि मेरे झुकते न झुकते
           उसके पाँवों की दिशा मेरी आँखों को लेकर
           खो गयी थी।

जब तुम मुझे मिले, एक खुला फटा हुआ लिफाफा
                        तुम्‍हारे हाथ आया।
            बहुत उसे उलटा-पलटा - उसमें कुछ न था -
            तुमने उसे फेंक दिया : तभी जाकर मैं नीचे
            पड़ा हुआ तुम्‍हें 'मैं' लगा। तुम उसे
            उठाने के लिए झुके भी, पर फिर कुछ सोचकर
            मुझे वहीं छोड़ दिया। मैं तुमसे
           यों ही मिल लिया था।

मेरी याददाश्‍त को तुमने गुनाहगार बनाया - और उसका
           सूद बहुत बढ़ाकर मुझसे वसूल किया। और तब
           मैंने कहा - अगले जनम में। मैं इस
           तरह मुसकराया जैसे शाम के पानी में
           डूबते पहाड़ गमगीन मुसकराते हैं।

मेरी कविता की तुमने खूब दाद दी - मैंने समझा
           तुम अपनी ही बातें सुना रहे हो। तुमने मेरी
           कविता की खूब दाद दी।

तुमने मुझे जिस रंग में लपेटा, मैं लिपटता गया :
          और जब लपेट न खुले - तुमने मुझे जला दिया।
          मुझे, जलते हुए को भी तुम देखते रहे : और वह
          मुझे अच्‍छा लगता रहा।

एक खुशबू जो मेरी पलकों में इशारों की तरह
          बस गयी है, जैसे तुम्‍हारे नाम की नन्‍हीं-सी
          स्‍पेलिंग हो, छोटी-सी प्‍यारी-सी, तिरछी स्‍पेलिंग।

आह, तुम्‍हारे दाँतों से जो दूब के तिनके की नोक
          उस पिकनिक में चिपकी रह गयी थी,
          आज तक मेरी नींद में गड़ती है।

अगर मुझे किसी से ईर्ष्‍या होती तो मैं
           दूसरा जन्‍म बार-बार हर घंटे लेता जाता 
पर मैं तो जैसे इसी शरीर से अमर हूँ -
           तुम्‍हारी बरकत!

बहुत-से तीर बहुत-सी नावें, बहुत-से पर इधर
           उड़ते हुए आये, घूमते हुए गुजर गये
           मुझको लिये, सबके सब। तुमने समझा
           कि उनमें तुम थे। नहीं, नहीं, नहीं।
उसमें कोई न था। सिर्फ बीती हुई
           अनहोनी और होनी की उदास
           रंगीनियाँ थीं। फकत।

advertisement

  • संबंधित खबरें