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राजनीति


मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ रहा हमशक्ल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में एक अनोखा उम्मीदवार है और उसका नाम है अभिनंदन पाठक। पाठक का चेहरा मोदी से मिलता-जुलता है। पाठक इस बार वाराणसी और लखनऊ से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी अखाड़े में हैं


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के खिलाफ चुनाव मैदान में एक अनोखा उम्मीदवार है और उसका नाम है अभिनंदन पाठक। पाठक का चेहरा मोदी से मिलता-जुलता है। पाठक इस बार वाराणसी और लखनऊ से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी अखाड़े में हैं।

पाठक (51) ने इससे पहले मोदी के पक्ष में प्रचार किया था और रातोंरात वह जाना-पहचाना चेहरा बन गए थे, क्योंकि उनकी शक्ल मोदी से काफी हद तक मिलती है। पाठक ने कहा, "जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो मुझे सम्मान और पहचान मिली। उनसे चेहरा मिलना मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है और इस वजह से लोग मुझे चाय पिलाते हैं, साथ में फोटो खिंचाना चाहते हैं।" 

उन्होंने कहा, "नोटबंदी के बाद चीजें बदल गईं और लोगों में इतनी निराशा थी कि वे मुझसे नफरत करने लगे। एक बार तो मोदी से मिलते चेहरे की वजह से कुछ लोगों ने मेरी पिटाई कर दी।"

इसके बाद पाठक पाला बदलकर कांग्रेस के समर्थक बन गए और राजस्थान एवं मध्य प्रदेश चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के लिए प्रचार किया। उन्होंने कहा, "कांग्रेस ने इस बार मुझे टिकट नहीं दिया तो मैं निराश हो गया। हालांकि मैं अब भी राहुल गांधी और उनकी नीतियों का समर्थक हूं।"

अभिनंदन पाठक पिछले पांच साल से लखनऊ में रह रहे हैं और पुजारी का काम कर जीवनयापन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी पहचान के लिए इस बार चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, "मैं किसी छाया में जीकर थक चुका हूं। मेरे चुनाव प्रचार का मुख्य मुद्दा 'रोटी, कपड़ा और मकान' है।"

पाठक मूल रूप से सहारनपुर के रहने वाले हैं और उन्होंने नामांकन के लिए जमानत राशि क्राउड फंडिंग के जरिये जुटाई है। उन्होंने कहा, "मैं लोगों से एक रुपये और एक वोट देने के लिए कहता हूं और यह उत्साहजनक है।"

पाठक ने नामांकन के दौरान दाखिल हलफनामे में कहा कि उनके पास अचल संपत्ति नहीं है और उनके बैंक खाते में 50 हजार रुपये हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की है। उन्होंने अब तक चार बार चुनाव लड़े हैं। दो बार सहारनपुर नगर निगम में 1999 में पार्षद के लिए और वर्ष 2012 में सहारनपुर नगर सीट से विधानसभा चुनाव।

उन्होंने 2017 में वाराणसी से विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन किया था, लेकिन उनका नामांकन खारिज हो गया था। उन्होंने इसे अदालत में चुनौती दी थी। उनके परिवार में पत्नी और छह बच्चे हैं, लेकिन वह अपने परिवार से अलग हो चुके हैं।
 

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