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राजनीति


एनसीपी के बागी नेता तारिक अनवर की कांग्रेस में वापसी हो रही है, गुलाम नबी आजाद परेशान हैं, जानिए पूरी कहानी!

यह दीगर है कि गुलाम नबी न कभी मुस्लिम वोटों के चैंपियन रहे हैं और न ही कभी कोई बड़े चुनाव प्रचारक। गांधी परिवार की कृपा दृष्टि से ही अब तलक उनका सियासी सफर आगे बढ़ा है। सो, गुलाम नबी नेपथ्य की इन आहटों से बेचैन हैं कि एनसीपी के बागी नेता तारिक अनवर की आने वाले दिनों में कांग्रेस में वापसी हो रही है


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इन दिनों कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद बेतरह परेशान हैं, उनकी परेशानी की असली वजह तारिक अनवर हैं जो कांग्रेस की देहरी पर खड़े हैं और उनके लिए कभी भी राहुल गांधी के दिल का दरवाजा खुल सकता है।

सूत्र बताते हैं कि गुलाम नबी ने शायद इसीलिए हड़बड़ी में यह बयान दे डाला कि उनकी पार्टी के हिंदू प्रत्याशी आजाद को अपने चुनाव प्रचार में बुलाने से घबराते हैं कि उनके आने से कहीं हिंदू वोट छिटक न जाएं।

यह दीगर है कि गुलाम नबी न कभी मुस्लिम वोटों के चैंपियन रहे हैं और न ही कभी कोई बड़े चुनाव प्रचारक। गांधी परिवार की कृपा दृष्टि से ही अब तलक उनका सियासी सफर आगे बढ़ा है। सो, गुलाम नबी नेपथ्य की इन आहटों से बेचैन हैं कि एनसीपी के बागी नेता तारिक अनवर की आने वाले दिनों में कांग्रेस में वापसी हो रही है।

सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी उन्हें पार्टी महासचिव बनाने के साथ-साथ यूपी का इंचार्ज भी बनाना चाहते हैं। वैसे भी राहुल की राजनीति पर अपनी बारीक नज़र रखने वाले लोग जानते हैं कि कांग्रेस का जो भी नेता ऐसा भ्रम पाल लेता है कि उनकी वजह से राहुल की राजनीति में परिपक्वता आई है या कहीं न कहीं वह राहुल का राजनैतिक गुरू बनने का दिखावा करता है वह कुछ समय बाद राहुल के मार्गदर्शक मंडल का सदस्य हो जाता है।

दिग्विजय सिंह के बारे में थाह पा लीजिए कि आज वे कहां हैं, जनार्दन द्विवेदी को भी समय काल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, अब बारी गुलाम नबी की है।

इस बार भी गुलाम नबी यूपी का प्रभार पाने की मशक्कत कर रहे थे, पर राहुल भी अपने पुराने अनुभवों की तासीर से अपनी नई सियासत का रास्ता बनाने में लगे हैं।

पिछली बार गुलाम नबी के पास जब यूपी का प्रभार था तो उन्होंने सपा से कांग्रेस का समझौता करा दिया था, वह भी सपा की शर्त्तों पर। इस समझौते में सपा ने कांग्रेस को वैसी सीटें टेक दीं जहां कभी कांग्रेस जीती ही न थी।

गोरखपुर उपचुनाव में भी गुलाम नबी ने एक ऐसे उम्मीदवार को कांग्रेस का टिकट पकड़ा दिया जो मात्र 15 हजार वोट ही ला पाया और इस बात को लेकर कांग्रेस की खासी किरकिरी हो गई।

राहुल के जेहन में कहीं न कहीं ये बातें धमाचौकड़ी मचा रही थीं, इसीलिए उन्होंने गुलाम नबी को ठंडे बस्ते में डालने का मन बना लिया है।
 

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