लोकसभा चुनाव/ दूसरे चरण में 61.12% मतदान, हिंसा के बावजूद बंगाल में सबसे ज्यादा 75.27% वोटिंग - Dainik Bhaskar     |       जेट के कर्मचारियों ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी, कहा-नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं - Hindustan     |       Lok Sabha Election 2019: कहीं दूल्हा-दुल्हन तो कहीं 105 साल की महिला पहुंची वोट देने, देखें Photos - NDTV India     |       BJP मुख्यालय में घुसकर पार्टी प्रवक्ता पर शख्स ने फेंका जूता, Video Shoe hurled at BJP GVL Narsimha Rao in press conference - Lok Sabha Election 2019 - आज तक     |       पूनम सिन्हा ने लखनऊ सीट से पर्चा भरा Poonam Sinha files nomination from Lucknow - Lok Sabha Election 2019 - आज तक     |       सरकार ने पाकिस्तान से LOC के जरिए होने वाले व्यापार पर लगाई रोक, जानें क्या है वजह - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       साध्वी प्रज्ञा की बेल रद्द होनी चाहिए: उमर अब्दुल्ला Omar Abdullah on Sadhvi Pragya- BJP made mockery of system - Lok Sabha Election 2019 - आज तक     |       कांग्रेस के 'चौकीदार चोर है' विज्ञापन पर चुनाव आयोग ने लगाई रोक - NDTV India     |       'मोदी जी की सेना' वाले बयान पर EC ने केन्द्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी को दी चेतावनी - ABP News     |       कांग्रेस-AAP गठबंधन पर फिर मंथन, राहुल गांधी से मिले पीसी चाको - आज तक     |       हिंदी न्यूज़ - 14 killed in attack on passenger bus on Makran Coastal Highway in Balochistan, Pakistan - हिन्दी समाचार, टुडे लेटेस्ट न्यूज़ इन हिन्दी - News18 इंडिया     |       पाक की नैया पार लगा रहे वित्त मंत्री का इस्तीफा, अधर में IMF पैकेज - trending clicks AajTak - आज तक     |       TMC leaders provoke party workers against central forces; 'chase away forces with brooms', 'don't spare them' - Times Now     |       पुलिस को कुछ देर रुकने की कहकर कमरे में गए और पूर्व राष्ट्र्पति ने खुद को मार ली गोली! - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       वोटिंग के बीच रिकॉर्ड बढ़त के साथ खुला बाजार, सेंसेक्‍स 39,400 के पार - आज तक     |       Hyundai की सबकॉम्पैक्ट SUV Venue हुई पेश, यहां देखें PHOTOS - Tech - आज तक     |       बजाज की 'छोटी कार' Qute लॉन्च, तस्वीरों से जानें क्या है खास - नवभारत टाइम्स     |       चीन में ई-कॉर्मस सर्विस बंद करेगा एमेजन, अलीबाबा ग्रुप से नहीं ले पाया टक्कर - ABP News     |       बॉडी शेमिंग पर फरदीन खान ने तोड़ी चुप्पी, कहा- ये पढ़कर हंसी आती है - आज तक     |       तनुश्री-विंता नंदा के बाद कंगना की बहन ने किया अजय देवगन पर हमला - नवभारत टाइम्स     |       बॉक्स ऑफिस/ अक्षय कुमार की केसरी को पीछे छोड़ वरुण धवन की कलंक ने पहले दिन कमाए 21.60 करोड़ रुपए - Dainik Bhaskar     |       फिर दिखा जाह्नवी कपूर का टशन, आई हैं लेटेस्ट तस्वीरें - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       विश्व कप के लिए पाकिस्तान की भी टीम घोषित, तूफानी गेंदबाज आमिर को नहीं मिली जगह - अमर उजाला     |       कप्तानी से हटाए गए मलिंगा, लेकिन श्रीलंका की वर्ल्ड कप टीम में शामिल - आज तक     |       SRHvsCSK: जानिए हार के बाद क्या कुछ बोले कप्तान सुरेश रैना - Hindustan     |       IPL 2019, DC vs MI: रोहित शर्मा आज बन सकते हैं T20 में 8 हजारी - Navbharat Times     |      

किताबें


उपन्यास डोंट टेल द गवर्नर में मोदी के 'नोटबंदी के खाके' को शब्द दिए रवि सुब्रमण्यम ने 

साल 2016 में जब नोटबंदी के बाद एटीएम के बाहर लोगों की बड़ी-बड़ी कतारें लगी थीं, उसी समय प्रकाशक अनंत पद्मनाभन ने लेखक रवि सुब्रमण्यम को फोन कर उनसे पूछा, "तुम वही सोच रहे हो, जो मैं सोच रहा हूं


ravi-subramaniam-who-gave-the-term-to-modis-tabla-khapke-in-the-novel-doont-tell-the-governor

साल 2016 में जब नोटबंदी के बाद एटीएम के बाहर लोगों की बड़ी-बड़ी कतारें लगी थीं, उसी समय प्रकाशक अनंत पद्मनाभन ने लेखक रवि सुब्रमण्यम को फोन कर उनसे पूछा, "तुम वही सोच रहे हो, जो मैं सोच रहा हूं?"

इस पर सुब्रमण्यम ने मुस्कुराकर कहा, "नोटबंदी ही ना। इस तरह 'डोंट टेल द गवर्नर' का प्रकाशन हुआ और अब यही उपन्यास बेस्टसेलर चार्ट में लगातार ऊपर चढ़ रहा है। 

सुब्रमण्यम इसे संयोग से अधिक बहुत कुछ मानते हैं, क्योंकि वह उस समय 'इन द नेम ऑफ गॉड' नामक किताब लिख रहे थे, जो तिरुवनंतपुरम में अनंत पद्मनाभ स्वामी मंदिर पर आधारित थी। उस समय उन्हें हार्पर कॉलिंस प्रकाशक से फोन आ रहे थे, जिनके प्रकाशन की ओर से हूबहू इसी नाम से प्रकाशन हो रहा था। उन्होंने कहा कि जहां तक मुझे लगता है, यह दैविक हस्तक्षेप था और मुझे पता था कि इस उपन्यास को लिखा जाना है।

आईआईएम-बेंगलुरू के पूर्व छात्र सुब्रमण्यम ने बताया, "उस समय आरबीआई गवर्नर द्वारा नोटबंदी की सराहना नहीं किए जाने को लेकर काफी हो-हल्ला मचा हुआ था। इस विचार ने मुझे आरबीआई गवर्नर को उपन्यास का नायक बनाए जाने पर विवश किया और फिर एक के बाद एक चीजें होती चली गईं।

आरबीआई गवर्नर और नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री के भाषण पर भी मेरा ध्यान गया, जहां उन्होंने आतंकवाद और जाली मुद्रा के बारे में बात की थी। उन्होंने कालेधन और मनी लांड्रिंग के बारे में बात की थी।

उन्होंने कहा, "आभूषण कारोबार के जरिए मनी लांड्रिंग को लेकर बवाल मचा था और उसके बाद अचानक इस थ्रिलर में बहुत कुछ जुड़ गया। इस तरह यह बन गया। कई सारे प्लॉट से कहानी को रफ्तार मिलती चली गई, बेहतरीन थ्रिलर के साथ एक के बाद एक कहानी में प्लॉट से यह रोचक है और इस तरह 'डोंट टेल द गवर्नर' तैयार हुई।"

सुब्रमण्यम ने कहा कि उन्होंने वास्तविक घटनाक्रमों को खास तवज्जो दी है। वह कहते हैं, "आरबीआई-सरकार के बीच का विवाद ही इसका विषय है, जो पूरी किताब में जारी रहता है। यह सिर्फ संयोग है कि दोनों ने वास्तविक जीवन में भी क्लैश पर विचार किया, जिस समय किताब जारी हुई। मेरी इसमें कोई भूमिका नहीं है।"

लेकिन ऐसा पहली बार नहीं है कि इस किताब की सामग्री की वास्तविक जीवन के घटनाक्रमों में समानता है। उदाहरण के लिए 'इन द नेम ऑफ गॉड' में एक किरदार का नाम नीरव चोकसी है, जो धोखाधड़ी करता है।

उन्होंने कहा, "कुछ लोग असहज हो गए क्योंकि यह किताब पीएनबी घोटाले में नीरव मोदी और मेहुल चोकसी के अपराधी होने से लगभग छह महीने पहले लांच हुई थी। मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि एक लेखक के रूप में आप आमतौर पर सीमाओं से परे हटकर सोचते हैं।

लोगों को संदेह से देखना आपकी प्रकृति बन जाती है। मुझे लगता है कि अपराधी दिन-प्रतिदिन रचनात्मक होते जा रहे हैं और लेखक रचनात्मक इंसान हैं।"

सुब्रमण्यम ने जोर देकर कहा कि उनका उपन्यास 'फिक्शन' है। उन्होंने पाठकों से इसका कुछ और मायने लगाने के बजाय इसका लुत्फ उठाने को कहा है। वह कहते हैं कि कोई भी घटनाक्रम जो हैरान कर देने वाला है और जो लोगों की नजर में रहता है, वह मुद्दा थ्रिलर के लिए बेहतरीन है और नोटबंदी ऐसा ही एक मुद्दा है।

वह पूछते हैं, "जब आठ नवंबर 2016 को नोटबंदी हुई थी तो किसी ने इसकी कल्पना नहीं की थी। वह किसी थ्रिलर कहानी में रोमांचक मोड़ की तरह था, जिसने सभी को चौंका दिया। यह ट्विस्ट किताब लिखे जाने के बाद भी उनके साथ लंबे समय तक रहा। नोटबंदी की गूंज को दो साल बीतने के बाद भी सुनी जा सकती है।" 

advertisement