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राजनीति


एनडी तिवारी की विरासत के भगवा मायने, आने वाले चुनावों में बीजेपी के लिए संजीवनी बन सकते हैं तिवारी!

यूपी के भगवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तिवारी के पार्थिव शरीर को लेकर लखनऊ तो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इसे लेकर देहरादून पहुंचे


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कांग्रेस के वयोवृद्ध नेता नारायण दत्त तिवारी की मृत्यु पर भी राजनीति शुरू हो गई है। तिवारी की ख्याति यूपी और उत्तराखंड में एक प्रमुख ब्राह्मण नेता के तौर पर रही है।

अभी उत्तराखंड में निकाय चुनाव होने हैं, सो हालिया दिनों में भाजपा से नाराज चल रहे अगड़ों को लुभाने के लिए भाजपा एनडी तिवारी के नाम के इस्तेमाल से भी संकोच नहीं कर रही है।

कांग्रेस ने एक तरह से भाजपा के लिए खुला मैदान छोड़ दिया है। क्योंकि तिवारी के अंतिम दर्शन के लिए तो सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह अवश्य पहुंचे, पर कांग्रेस के प्रदेश स्तर के नेताओं ने तिवारी के अंतिम दर्शन को लेकर कोई उत्साह नहीं दिखाया। कहना न होगा कि इस नायाब मौके को भाजपा ने फौरन लपक लिया।

यूपी के भगवा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तिवारी के पार्थिव शरीर को लेकर लखनऊ तो उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इसे लेकर देहरादून पहुंचे।

जब पत्रकारों ने इस बाबत नेहरू युवा केंद्र के कन्वेनर से उनकी राय जाननी चाही तो उन्होंने सपाट लहजे में कह दिया-चूंकि तिवारी जी दोनों राज्यों यूपी और उत्तराखंड के सीएम रह चुके हैं, इसीलिए दोनों राज्यों के सीएम उनके पार्थिव शरीर को ले जा रहे हैं।

शायद कन्वेनर महोदय इस तथ्य से अनजान थे कि तिवारी सन् 1969 में कांग्रेस युवा संगठन के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
 

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