कोलकाता/ भाजपा के खिलाफ ममता की महारैली आज, 11 विपक्षी पार्टियों के नेता कोलकाता पहुंचे - Dainik Bhaskar     |       भय्यू महाराज केस: ब्लैकमेलर युवती समेत दो सेवादार गिरफ्तार, अश्लील चैटिंग का मिला रिकॉर्ड - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       कांग्रेस की बैठक में नहीं पहुंचे 4 'बागी' MLA, कर्नाटक सरकार में बढ़ी चिंता - News18 Hindi     |       अमेरिका/ 8 डॉलर का नाश्ता लेने के लिए लाइन में लगे बिल गेट्स, सोशल मीडिया पर वायरल हुई फोटो - Dainik Bhaskar     |       सवर्ण आरक्षण: निजी उच्च शिक्षा संस्थानों में 10% कोटे के लिए विधेयक लाएगी सरकार - Hindustan     |       Grahan 2019/ इस साल पड़ेंगे कुल 5 ग्रहण, 2 चंद्रग्रहण और 3 सूर्यग्रहण से बदलेगी दशा, जानें कब-कब होंगे ग्रहण? - Dainik Bhaskar     |       21 को साल का पहला चंद्र ग्रहण, इन राशियों पर होगा ज्यादा असर - dharma - आज तक     |       सबरीमाला/ सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 10-50 उम्र की 51 महिलाओं ने दर्शन किए- केरल सरकार - Dainik Bhaskar     |       Two Russian fighter jets collide over Sea of Japan - Times Now     |       हादसा/ जापानी समुद्र के ऊपर अभ्यास के दौरान दो रूसी फाइटर जेट टकराए, पायलट सुरक्षित - Dainik Bhaskar     |       यूके/ ब्रेग्जिट डील फेल होने के बाद संसद में थेरेसा मे अविश्वास प्रस्ताव में जीतीं, 19 वोटों से बचाई सरकार - Dainik Bhaskar     |       रिसर्च : यह तकनीक बता देगी कि कितने साल की जिंदगी है आपकी - NDTV India     |       उठा-पटक के बीच बाजार की सपाट क्लोजिंग - मनी कॉंट्रोल     |       Market Live: Nifty slips below 10900, Sensex trades lower; pharma stocks under pressure - Moneycontrol.com     |       शनिवार को पेट्रोल-डीजल के दाम में हुई भारी बढ़ोतरी, फटाफट जानिए नए रेट्स - News18 Hindi     |       तस्वीरों में देखें Toyota Camry Hybrid 2019 कार, भारत में हुई लॉन्च- Amarujala - अमर उजाला     |       'मणिकर्णिका' की स्पेशल स्क्रीनिंग, राष्ट्रपति कोविंद और लालकृष्ण आडवाणी ने देखी फिल्म - नवभारत टाइम्स     |       राजी, बधाई हो से आगे निकली URI, क्या 100 करोड़ कमाएगी फिल्म? - आज तक     |       व्हाय चीट इंडिया : फिल्म समीक्षा | Webdunia Hindi - Webdunia Hindi     |       विवाद/ बोनी कपूर का एलान जब तक बंद नहीं हो जाती फिल्म श्रीदेवी बंगलो, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे - Dainik Bhaskar     |       IND vs AUS 3rd ODI LIVE: Shami sends back Maxwell as Oz lose sixth wicket - Moneycontrol.com     |       ऑस्ट्रेलिया में चली चहल की फिरकी, शास्त्री-मुश्ताक के रिकॉर्ड टूटे - Sports - आज तक     |       Paul Pogba praises Ole Gunnar Solskjaer for revitalising Manchester United's attack - Times Now     |       Ind vs Aus 2nd ODI: शॉन मार्श पर भारी पड़ा 'किंग कोहली' का शतक, टीम इंडिया 6 विकेट से जीती - NDTV India     |      

राजनीति


इतना भी बेअसर नहीं रहेगा शिवपाल का समाजवादी सेक्युलर मोर्चा

शिवपाल ने जो ठोकी ताल कई हुए बेहाल: शिवपाल खासे जोश में हैं। उन्हें महसूस हो रहा है कि भले ही झुंझला कर ताव में ये दांव आजमाया हो पर उनका लगाया दांव ठीक पड़ा है। अपनी नयी नवेली पार्टी का संगठन बनाने जहां जहां वे जा रहे हैं। उनको भाव मिल रहा है, भीड़ जुट रही है


shivpals-socialist-secular-morcha-will-not-be-too-ineffective

समाजवादी सेक्युलर मोर्चे का झंडा जारी होने के बाद अब पार्टी के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी तेज हो गई और संगठनात्मक ढांचा मजबूत करने की कवायद भी। इस तेजी ने सपा के होश गुम कर दिये हैं और बसपा भी किंचित चिंतित है। 

कांग़्रेस सचेत हुयी है तो वहीं भाजपा यूपी के भाजपा अध्यक्ष महेंद्र नाथ पांडेय शिवपाल यादव की तारीफों के पुल बांधते हुये, उन्हें जमीनी नेता बताते फिर रहे हैं।

जो राजनीति के विश्लेषक यह कह रहे थे कि शिवपाल और उनकी पार्टी आगामी चुनाव में बेअसर साबित होगी, यह बस वोट कटवा भर हो सकती है, वे अब इसे महागठबंधन के मंसूबों पर भी इससे असरकारक मान रहे हैं।

फिलहाल शिवपाल खासे जोश में हैं। उन्हें महसूस हो रहा है कि भले ही झुंझला कर ताव में ये दांव आजमाया हो पर उनका लगाया दांव ठीक पड़ा है। अपनी नयी नवेली पार्टी का संगठन बनाने जहां जहां वे जा रहे हैं। उनको भाव मिल रहा है, भीड़ जुट रही है।

सो उनकी पार्टी सेक्युलर मोर्चे ने सूबे की सभी सीटों से उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। वे अपने टिकट पर समाजवादी पार्टी के मुखिया और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के पिता तथा अपने बड़े भाई मुलायम सिंह यादव को मैनपुरी से उतारने जा रहे हैं।

अगर वे उनके टिकट से नहीं लड़ते तो वे वह सीट उनके सम्मान में छोड़ कर बाकी 79 सीटों पर मुकाबले को तैयार हैं। शिवपाल पूछते फिर रहे हैं कि अगर वाकई सांप्रदायिक ताकतों से लड़ना है तो महागठबंधन उनसे गुरेज क्यों कर रही है, जबकि उनकी पार्टी के नाम के आगे सेक्युलर भी लगा है।

उनका दावा है कि उनके बगैर महागठबंधन अधूरा है, शिवपाल के इस तरह उत्साह से भरे होने का सबब यह है कि मोर्चे की घोषणा के महीने भर के भीतर कई कद्दावर नेता उनके संपर्क में आ चुके हैं और कुछ ऐसे भी राजनीतिबाज जो थोक वोटों के बड़े आढ़ती हैं।

राजनीति के गणितज्ञ उनको यह बता कर खुश कर रहे हैं कि समाजवादी पार्टी बसपा के साथ गठबंधन के चलते अपनी जो सीटें उसके लिये छोड़ेगी उस पर मोर्चे की जीत पक्की है।

इसी तरह बसपा के विद्रोहियों की सीट पर भी हाथ साफ किया जा सकता है, फिर  एटा, इटावा, मैंनपुरी, कन्नौज, जैसी आधा दर्जन सीटों पर अभी से समाजवादी सेकुलर मोर्चा भारी है।

नजदीकी अंतर से जीत हार वाली सीटों पर ध्यान रखले तो कुल मिलाकर 30 सीटों पर तो जीत तय है। अब अगर पीस पार्टी, ओमप्रकाश राजभर की सुहेल देव भारतीय समाज पार्टी तथा ओवैसी के दल के साथ भीम आर्मी का समर्थन भी हासिल कर लिया जाये।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जाति समीकरनॉं का तानाबाना ठीक कर लिया जाये और मुस्लिम, यादव, दलित समीकरण अपने हक में बनाया जा सके तो इन सीटों की संख्या कुछ बढ भी सकती है।

कभी टिकट कटने पर सपा के खिलाफ खड़े होने वाले शारदा प्रताप शुक्ल  और सपा से दूरी बना चुके अंबिका चौधरी, नारद राय जैसों वरिष्ठ नेताओं का साथ मिलने का शिवपाल को पूरा भरोसा है तो शादाब फातिमा, दीपक मिश्र, नवाब अली अकबर, सुधीर सिंह, प्रोफेसर दिलीप यादव, अभिषेक सिंह आशू, मोहम्मद फरहत रईस खान और अरविंद यादव जैसे दर्जन भर और नेता उनके साथ आ सकते हैं।

मुख्तार अंसारी और ओम प्रकाश सिंह सरीखे नेता भी शिवपाल के खेमे से जुड़ सकते हैं। चर्चा में तो और भी ढेर सारे नाम हैं, शायद वे तेल और तेल की धार देख रहे हैं, मुलायम की मंशा भांप रहे हैं, गठबंधन के ऊंट की करवट और कल निहार रहे हैं।

अपनी सीट की सुनिश्चितता तय कर रहे हैं, पार्टी के रजिस्ट्रेशन का इंतज़ार कर रहे हैं, भले ही पार्टी का रजिस्ट्रेशन अभी बाकी हो लेकिन झंडा सार्वजनिक हो गया है। ये जो झंडा जो आप देख रहे हैं, इसमें लाल और हरा तो समाजवादी पार्टी के पुराने झंडे से लिया गया है पर पीला रंग क्यों और कहां से आया है साफ नहीं हुआ है।

झंडे पर शिवपाल का अपनी तस्वीर लगाने का कोई तुक हो पर मुलायम सिंह यादव जो अभी उनकी पार्टी से नहीं जुड़े हैं और उनका आशीर्वाद बस कथित तौर पर ही शिवपाल के साथ है उनकी तस्वीर का क्या तुक। सियासत में हर बात की तुक नहीं होती, अगर तीर सही निशाने पर लग रहा है, तो बेतुकी चीजें भी दुरुस्त हैं।

हालांकि शिवपाल का तीर बह्ले निशाने पर हो लेकिन शिवपाल के इस नए सियासी कदम से मुलायम सिंह की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। बेटे और भाई को चुनने का धर्म संकट कम बड़ा नहीं होता।

फिलहाल शिवपाल की सक्रियता को देखते हुये सूबे के सियासी हलकों में आजकल एक सवाल तेजी से उभरा है। सवाल यह है कि अगर अखिलेश और शिवपाल के बीच मुकाबला हुआ तो कौन जीतेगा। जवाब है भाजपा।

हद तो यह है कि शिवपाल यादव के मोर्चे का नाम है समाजवादी सेक्युलर मोर्चा और शिवपाल अपने मोर्चे को सांप्रदायिक ताकत यानी भाजपा के खिलाफ बताते हैं, जबकि भाजपा शिवपाल की प्रशंसा कर रही है।

फिलहाल शिवपाल के समाजवादी सेक्युलर मोर्चे क आसर तो होगा देखना यह होगा कि शिवपाल के मोर्चे का असली शिकार कौन बनता है, भाजपा या सपा।

advertisement

  • संबंधित खबरें