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राजनीति


ख़बरिया की खबर पर मोहर | 19 साल बाद कांग्रेस में लौटे तारिक अनवर, राहुल ने किया स्वागत

अनवर ने 28 सितंबर को पार्टी प्रमुख शरद पवार द्वारा राफेल सौदे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के विरोध में एनसीपी छोड़ दी थी और लोकसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था


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कुछ दिन पहले खबरिया डॉट कॉम ने आपको एक जानकारी थी कि इन दिनों कांग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आजाद बेतरह परेशान हैं, उनकी परेशानी की असली वजह तारिक अनवर हैं जो कांग्रेस की देहरी पर खड़े हैं और उनके लिए कभी भी राहुल गांधी के दिल का दरवाजा खुल सकता है।

जी हाँ, तो यह दरवाजा पूरी तरह खुल चूका है और तारिक अनवर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) को अलविदा कहने के बाद तारिक अनवर, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में कांग्रेस में दोबारा शामिल हो गए। उन्होंने लगभग दो दशक पहले कांग्रेस का दामन छोड़ दिया था।

 

राहुल ने अनवर का कांग्रेस परिवार में स्वागत किया। पार्टी ने दोनों नेताओं के हाथ मिलाते हुए तस्वीर ट्वीट की।

अनवर ने 28 सितंबर को पार्टी प्रमुख शरद पवार द्वारा राफेल सौदे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दिए जाने के विरोध में एनसीपी छोड़ दी थी और लोकसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था।

अनवर ने 1999 में विदेशी मूल की सोनिया गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त करने के विरोध में पार्टी छोड़ दी थी।

वैसे अगर सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी तारिक अनवर को पार्टी महासचिव बनाने के साथ-साथ यूपी का इंचार्ज भी बनाना चाहते हैं। वैसे भी राहुल की राजनीति पर अपनी बारीक नज़र रखने वाले लोग जानते हैं कि कांग्रेस का जो भी नेता ऐसा भ्रम पाल लेता है कि उनकी वजह से राहुल की राजनीति में परिपक्वता आई है या कहीं न कहीं वह राहुल का राजनैतिक गुरू बनने का दिखावा करता है वह कुछ समय बाद राहुल के मार्गदर्शक मंडल का सदस्य हो जाता है।

दिग्विजय सिंह के बारे में थाह पा लीजिए कि आज वे कहां हैं, जनार्दन द्विवेदी को भी समय काल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, अब बारी गुलाम नबी की है।

इस बार भी गुलाम नबी यूपी का प्रभार पाने की मशक्कत कर रहे थे, पर राहुल भी अपने पुराने अनुभवों की तासीर से अपनी नई सियासत का रास्ता बनाने में लगे हैं।

पिछली बार गुलाम नबी आजाद के पास जब यूपी का प्रभार था तो उन्होंने सपा से कांग्रेस का समझौता करा दिया था, वह भी सपा की शर्त्तों पर। इस समझौते में सपा ने कांग्रेस को वैसी सीटें टेक दीं जहां कभी कांग्रेस जीती ही न थी।

गोरखपुर उपचुनाव में भी गुलाम नबी ने एक ऐसे उम्मीदवार को कांग्रेस का टिकट पकड़ा दिया जो मात्र 15 हजार वोट ही ला पाया और इस बात को लेकर कांग्रेस की खासी किरकिरी हो गई।

 

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