समझौता ब्लास्ट में सभी आरोपी बरी होने पर भड़का पाकिस्तान, भारत ने दिया जवाब - आज तक     |       BSP chief Mayawati not to contest Lok Sabha elections - Times Now     |       जारी है मेहुल चोकसी को भारत लाने की प्रक्रिया - Navbharat Times     |       लोकसभा चुनाव 2019: भाजपा के प्रत्याशी घोषित नहीं, नामांकन की तारीखें तय - Amarujala - अमर उजाला     |       पीएम मोदी के बारे में क्या सोचते हैं 'चौकीदार' - आज तक     |       जम्‍मू-कश्‍मीर: सीआरपीएफ जवान ने तीन साथियों को गोलियों से भूना, खुद को भी गोली मारी - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       मनोहर पर्रिकर की तस्वीर बगल में रख गोवा के नए सीएम डॉ. प्रमोद सावंत ने संभाला कामकाज - नवभारत टाइम्स     |       3 दिन, 13 अंदाज: बोट यात्रा से छाईं प्रियंका गांधी, Photos - Lok Sabha Election 2019 - आज तक     |       जिम्बाब्वे में चली ऐसी हवा झटके में 300 लोगों को मौत की नींद सुला गई - Zee News Hindi     |       माल्या के मुकाबले नीरव को जल्द भारत लाने की उम्मीद - नवभारत टाइम्स     |       गूगल पर 11,760 करोड़ रुपये का जुर्माना - BBC हिंदी     |       दुनिया के खुशहाल देशों की रैंकिंग में भारत सात पायदान नीचे खिसक कर 140वें स्थान पर पहुंचा - ABP News     |       Hyundai Motor, Kia Motors to invest $300 million in Ola - Times Now     |       होली के सदाबहार गाने जिनके बिना अधूरा है रंगों का त्योहार - आज तक     |       लगातार सातवें दिन तेजी, निफ्टी 11500 के पार बंद - मनी कॉंट्रोल     |       एनालिसिस/ 2.47 लाख करोड़ रु के दान के बाद भी गेट्स की नेटवर्थ 130 देशों की जीडीपी से ज्यादा - Dainik Bhaskar     |       kesari movie review in hindi, Rating: {4.0/5} - केसरी मूवी रिव्यू ,रेटिंग: {4.0/5} : अक्षय कुमार,परिणीति ... - नवभारत टाइम्स     |       केसरी: अक्षय कुमार की जुबानी, फिल्म रिलीज से पहले जान लें क्लाइमैक्स - आज तक     |       My father is doing well: Ranbir Kapoor opens up about dad Rishi Kapoor's health - Times Now     |       हिना खान ने इंस्टाग्राम पर दिखाया होली स्वैग, यूजर्स बोले- 'कभी तो खुद के खरीदे कपड़े पहना करों'- Amarujala - अमर उजाला     |       ICC world cup 2019: इस विश्व कप में भारत को इंग्लैंड से है सबसे ज्यादा खतरा, पर दूसरे देश का नाम सुनकर चौंक जाएंगे आप - दैनिक जागरण (Dainik Jagran)     |       सौरव गांगुली ने वर्ल्ड कप में नंबर 4 पोजिशन के लिए सुझाया इस खिलाड़ी का नाम - Hindustan     |       IPL-12: चौथी बार ट्रोफी जीतने उतरेगी मुंबई इंडियंस, संतुलन है टीम की ताकत - Navbharat Times     |       कोलकाता/ मैच में बल्लेबाजी करते हुए गिरा खिलाड़ी, हुई मौत - Dainik Bhaskar     |      

फीचर


पहाड़ों की मिठास को मात दे रही संभल की स्ट्रॉबेरी

कहते हैं अगर इंसान कुछ करने की ठान ले तो क्या नहीं कर सकता। उत्तर प्रदेश में सूखाग्रस्त एक जिला संभल भी है, जहां प्रदेश सरकार ने किसानों को मुआवजा भी दिया था। इस स्थिति में यहां पर कोई स्ट्रॉबेरी की फसल उगाने के बारे में सोचेगा भी नहीं


strawberries-to-beat-the-sweetness-of-the-mountains

कहते हैं अगर इंसान कुछ करने की ठान ले तो क्या नहीं कर सकता। उत्तर प्रदेश में सूखाग्रस्त एक जिला संभल भी है, जहां प्रदेश सरकार ने किसानों को मुआवजा भी दिया था। इस स्थिति में यहां पर कोई स्ट्रॉबेरी की फसल उगाने के बारे में सोचेगा भी नहीं।

लेकिन मौसम के बिल्कुल विपरीत जाकर ऐसा किया है यहां के एक किसान तंजीम ने। तंजीम ने पहले मध्य प्रदेश से स्ट्रॉबेरी के पौधे लाकर डेढ़ एकड़ कृषि भूमि में फसल लगाई। इसमें पहली बार में ही उन्हें अच्छा फायदा हुआ। इससे वह फसल की बुआई के रकबे को बढ़ाते चले गए और इस बार आठ एकड़ से ज्यादा जमीन में स्ट्राबेरी की फसल लगाई है।

उन्होंने बताया कि स्ट्राबेरी की आपूर्ति लखनऊ, दिल्ली के साथ पहाड़ी क्षेत्र नैनीताल, शिमला और मसूरी में भी की जाती है। इसके साथ ही पड़ोसी देश नेपाल में भी स्ट्रॉबेरी की आपूर्ति की जाती है। फसल के लिए उपयोगी तापमान लाने के लिए काली पन्नी (पॉलिथीन) लगाई जाती है। उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी के खेत में फल की तुड़वाई, ढुलवाई और पैकिंग भी की जाती है। 

तंजीम के मुताबिक, वह स्ट्राबेरी का पौधा पूना और हिमाचल प्रदेश से लाते हैं, जिसे 25 सितंबर से अक्टूबर तक के बीच लगाया जाता है। पौधा लगाने के लगभग 60 दिनों बाद फल आ जाता है, जो लगभग 40 दिन में पक जाता है। ठंड के मौसम में फल पकने में ज्यादा समय लगता है। यह बहुत नाजुक फल होता है, इसलिए फल को मिट्टी में गिरने से बचाने के लिए पौधे की जड़ में पॉलिथीन बिछाई जाती है। इसकी खेती को एक बच्चे की तरह पालना पड़ता है। 

उन्होंने बताया, "यहां पर पैदा होने वाली स्ट्राबेरी को सबसे ज्यादा नैनीताल भेजा जा रहा है। सिंघाड़े के आकार वाले इस फल की मांग पहाड़ों पर बढ़ रही है, जो क्षेत्र के लोगों के लिए रोजगार का साधन बन गया है। ऐसे में यह गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में काफी कारगर सिद्ध हो रही है। लेकिन इस मंहगाई में फसल की लागत ज्यादा है।"

मुरादाबाद जोन के आयुक्त यशवंत राय ने कहा कि पहाड़ की खेती मैदानी इलाकों में देख कर अच्छा लगा। वह स्ट्राबेरी की खेती के लिए सरकार से सहयोग दिलाएंगे और किसानों को इस खेती के लिए प्रोत्साहित करेंगे।

advertisement