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राजनीति


एक नई इबारत लिखने को बेकरार देश के उपराष्ट्रपति, करना चाहते हैं विधान परिषद के चुनाव की नीतियों में परिवर्तन

वेंकैया का मानना है कि राज्यसभा समेत विधान परिषदों के बारे में यह एक आम धारणा बन गई है कि यह वैसे नेताओं के पुनर्वास की पनाहगाह है जो नेता किसी भांति चुनाव में जीत कर नहीं आ पाते


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'हसरतों के मेले में इश्क के खिलौने ढूंढता हूं
जुगनुओं की बस्ती में सूरज के ठिकाने ढूंढता हूं
क्या वक्त है, कैसी हवा चली है
रेत के समंदर में तेरे आशियाने ढूंढता हूं'

वेंकैया नायडू एक नई सियासी धारा के प्रर्वत्तक बनकर उभरना चाहते हैं। उन्होंने अपने कुछ करीबी लोगों से मुलाकात में यह साफ किया है कि वे लेजिस्लेटिव काऊंसिल यानी विधान परिषदों के चुनाव की नीतियों में एक आमूल चूल बदलाव लाना चाहते हैं।

वेंकैया देश के उप राष्ट्रपति हैं, इस नाते वे राज्यसभा के उप सभापति भी हैं। वेंकैया का मानना है कि राज्यसभा समेत विधान परिषदों के बारे में यह एक आम धारणा बन गई है कि यह वैसे नेताओं के पुनर्वास की पनाहगाह है जो नेता किसी भांति चुनाव में जीत कर नहीं आ पाते।

वेंकैया इस भ्रांति को तोड़ना चाहते हैं, क्योंकि चुनाव जीतने के मामले में उनका रिकार्ड भी निहायत फिसड्डी रहा है। वेंकैया भाजपा से दीगर अन्य दलों से भी बात कर रहे हैं।

उन्होंने बकायदा एक कमेटी का भी गठन कर दिया है जो राज्यसभा के नियमों में बदलाव के बारे में भी अपने सुझाव उप सभापति को देगी।

फिलहाल देश के 29 राज्यों में से 7 राज्यों में विधान परिषद का अस्तित्व है, वेंकैया इनके वजूद को एक नए सिरे से परिभाषित करने में जुटे हैं।
 

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