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गपशप


एक बार फिर से प्रधानमंत्री पद की महत्त्वकांक्षा है या कुछ और, मौन मनमोहन आखिर क्यों अब बोलने लगे हैं?

मनमोहन ने अपने स्वास्थ्य और डॉक्टरों की नसीहत का हवाला देते हुए, दिल्ली से इतर कहीं और जा सकने में असमर्थता जता दी थी। पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आए और हिंदी पट्टी में जब कांग्रेस का पंजा जनादेश लपकने में कामयाब रहा तो एक बार फिर से राहुल ने मनमोहन से बात की


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सियासत की तासीर में वह जादू है जो उम्र को हावी नहीं होने देती, महत्त्वाकांक्षाओं को बेबसी की जंजीरों में कैद नहीं होने देती। देश के पूर्व प्रधानमंत्री सरदार मनमोहन सिंह को कांग्रेस के युवा अध्यक्ष राहुल गांधी ने यूं तो इन पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से पूर्व भी बुलाया था और उनके साथ गंभीर मंत्रणा की थी और साथ ही आग्रह भी की कि मनमोहन मध्य प्रदेश में कुछ चुनावी रैलियों को संबोधित करें।

पर मनमोहन ने अपने स्वास्थ्य और डॉक्टरों की नसीहत का हवाला देते हुए, दिल्ली से इतर कहीं और जा सकने में असमर्थता जता दी थी। पांच राज्यों के चुनावी नतीजे आए और हिंदी पट्टी में जब कांग्रेस का पंजा जनादेश लपकने में कामयाब रहा तो एक बार फिर से राहुल ने मनमोहन से बात की।

जब तक राहुल को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश का बयान भी सामने आ गया था कि वे राहुल को पीएम उम्मीदवार स्वीकार करने को राजी नहीं। तब राहुल ने इस पूर्व प्रधानमंत्री से लंबी गुफ्तगू की, सूत्रों की मानें तो राहुल ने मनमोहन से कहा कि अगर किसी वजह से उनके यानी राहुल के नाम पर सहमति नहीं बनती है तो आप तीसरी बार पीएम बनने के लिए तैयार हो जाओ, परिवार (गांधी परिवार) पूरी तरह आपके साथ है।

राहुल ने आगे कहा कि इसके लिए उन्हें यानी मनमोहन को बस इतना करना है कि वे अलग-अलग दलों के क्षत्रपों के मन टटोले, उनके संपर्क में रहें, राज्यों की राजधानी जाएं, उन बड़े नेताओं के साथ लंच-डिनर करें और कांग्रेस के पक्ष में एक सर्वसम्मति बनाने का प्रयास करें। उस नेता के साथ राज्य की राजधानी में संयुक्त प्रेस-कांफ्रेंस करें और जनता में यह संदेश देने का प्रयास करें कि अब यूपीए का कुनबा बढ़ रहा है, उसकी ताकत बढ़ रही है और उसकी एकता भी।

बात मौन मनमोहन के समझ में आ गई, अब वे बोलने भी लगे हैं और डॉक्टरों की नसीहतों को धत्ता बताते हुए नए वर्श में अपने इस ’जनसंपर्क अभियान’ का श्रीगणेश भी करने जा रहे हैं।
 

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