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गुड न्यूज


 पुरूषों के वर्चस्व वाला राजमिस्त्री का काम कर रही हैं महिलाएं 

महिलाओं को राजमिस्त्री बनाने की परिकल्पना यह देखकर की गई है कि महिलाओं को सिर पर बोझ उठाकर मजदूरी न करना पड़े। महिलाएं अब अपना घर एवं स्वच्छ शौचालय का निर्माण अपने हाथों से करेंगी।


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उत्तरप्रदेश ने विकास की लहर में महिलाओं की स्थिति पहले से ज्यादा सबल रूप में बदलना शुरू कर दिया गया है। प्रदेश के इटावा शहर में अब सिर पर बोझ लेकर मजदूरी करने वाली महिलाओं के दिन भी फिरने शुरू हो गए हैं। ये महिलाएं अब हाथों में कन्नी वसूली लेकर बड़ी-बड़ी इमारतों में काम करते नजर आ रही है। महिलाओं को मजदूरी छोड़कर राजमिस्त्री बनाने संबंधी पहला प्रयास महेवा विकास खंड से शुरू हुआ है। प्रदेश सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय आजीविका मिशन के समूहों से जुड़ी महिलाएं शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभांवित होंगी। इसी योजना की शुरूआत में 70 महिलाएं को प्रशिक्षण देकर राजमिस्त्री बनाया जा चुका है। महिला उत्थान और सशक्तीकरण का यह जमीनी प्रयास आने वाले दिनों में महिला स्वावलंबन की दिशा में कारगर कदम साबित होने वाला है। 

कहा जा रहा है कि एशियाई द्वीप में जब विकास की परिकल्पना हुई थी तो उत्तरप्रदेश में पहला विकास खंड बनने का सौभाग्य भी महेवा को ही प्राप्त हुआ था। इटावा से सटे इस प्रखंड में दोबारा राजमिस्त्री बनने की इस नई परंपरा की शुरूआत भी इसी ब्लाक से होना अपने आप में महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के समूहों से जुड़ी महिलाएं शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभांवित होंगी। योजना की शुरूआत में 70 महिलाएं को प्रशिक्षण देकर राजमिस्त्री बनाया जा चुका है। राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत महिलाओं के समूह गठित किए गए हैं। इस मिशन में ज्यादातर गरीब और मजदूर तबके की महिलाएं शामिल हैं। 

अभी तक राजमिस्त्री के कार्यक्षेत्र में महिलाएं नहीं दिखती थीं। लेकिन अब हर क्षेत्र में आगे बढने वाली महिलाओं ने इस क्षेत्र की चुनौतियों को भी स्वीकार किया। पहली बार 70 महिलाओं को राजमिस्त्री बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। महेवा विकास खंड सभागार में तीन दिन तक चले प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को राजमिस्त्री किट भी निशुल्क प्रदान की गई। अब इन महिलाओं को मनरेगा तथा पंचायत विभाग की योजनाओं होने वाले निर्माण कार्यों में जोड़ा जाएगा। गांव में ही उनको रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। मजदूरी करने में ज्यादा मेहनत और कम पारिश्रमिक से भी छुटकारा मिलेगा। अब उन्हें राजमिस्त्री का काम करने से आमदनी भी अधिक होगी। परिवार का जीवन स्तर भी बदलेगा । 

इटावा के मुख्य विकास अधिकारी पीके श्रीवास्तव का कहना है कि महिला सशक्तीकरण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। महिलाओं को राजमिस्त्री बनाने की परिकल्पना यह देखकर की गई है कि महिलाओं को सिर पर बोझ उठाकर मजदूरी न करना पड़े। महिलाएं अब अपना घर एवं स्वच्छ शौचालय का निर्माण अपने हाथों से करेंगी। जिन महिलाओं के घरों में शौचालय नहीं है। उन्हें स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय दिया जाएगा। शौचालय का निर्माण महिलाएं खुद करेंगी। इसके अलावा गांव में विभिन्न योजनाओं से होने वाले कामों में भी इन महिलाओं को रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे महिलाओं के जीवन स्तर में सुधार आएगा। महेवा से इस योजना शुरूआत की गई है। आने वाले समय में जिले के सभी ब्लाकों में महिलाओं को प्रशिक्षित कर राजमिस्त्री बनाया जाएगा। 

स्वच्छ भारत मिशन की खंड प्रेरक मीनाक्षी चौहान का कहना है कि यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर  बनाने में काफी सहायक सिद्ध होगी। राष्ट्रीय आजीविका मिशन योजना में जुड़े अन्य समूहों को भी प्रशिक्षण में शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षित महिलाएं अपना घर अपने हाथ से बनाएंगी। उसे सजाएगी और संवारेंगी भी। 

प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी जगमोहनपुर गांव की लाजवंती और सुनीता का कहना है कि राजमिस्त्री का प्रशिक्षण लेकर उन्होंने अपने जीवन में बदलाव महसूस किया है। अभी तक राजमिस्त्री से काम कराना बहुत महंगा पड़ता था। अब सबसे पहले वे अपना घर अपने हाथों से संवारेगी। इसके बाद कामकाज कर अपनी आमदनी बढ़ाएंगी। बच्चों की परवरिश भी बेहतर ढंग से हो सकेगी। 

जगमोहनपुर की साधना का कहना है कि राजमिस्त्री का काम करने से उनकी आमदनी में दुगना इजाफा होगा। आमदनी बढने से वे अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाएंगी। जिससे वे आगे चलकर समाज में अपना स्थान हासिल कर सकें। इस योजना से उन्हें जीवन में एक नई शुरूआत का एहसास हुआ है।

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